मुरादाबाद और संभल की दो मासूम बच्चियों की मौत पर उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज

मुरादाबाद/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आवारा कुत्तों का आतंक अब केवल स्थानीय समस्या नहीं रहा, बल्कि यह सीधे तौर पर राज्य की संवैधानिक विफलता का प्रतीक बन चुका है। मुरादाबाद और संभल में आवारा कुत्तों के हमलों से दो मासूम बच्चियों की दर्दनाक मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इसके बावजूद शासन-प्रशासन की उदासीनता जस की तस बनी हुई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग (UPHRC) ने संज्ञान लेते हुए औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कर ली है। World Accreditation of Human Rights से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता जरीस मलिक द्वारा दाखिल शिकायत को आयोग ने डायरी संख्या 551/IN/2026 (दिनांक 23 जनवरी 2026) आवंटित की है।
शिकायत में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया है कि Known & Foreseeable Risk होने के बावजूद जिला प्रशासन ने कोई प्रभावी रोकथामात्मक कदम नहीं उठाए। पूर्व में हुई घटनाएँ, स्थानीय लोगों की शिकायतें और लगातार चेतावनियाँ प्रशासन की फाइलों तक सीमित रहीं, जबकि ज़मीनी हकीकत में मासूमों की जान जाती रही।
शिकायतकर्ता ने इसे महज़ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि Failure of Constitutional Governance करार दिया है। आरोप है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार), अनुच्छेद 14, 15(3) एवं 39(f) का खुला उल्लंघन हुआ है। बच्चों के जीवन की रक्षा करना राज्य का संवैधानिक दायित्व है, जिससे शासन ने स्पष्ट रूप से मुँह मोड़ लिया।
आयोग से दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराने तथा पीड़ित परिवारों को समुचित मुआवज़ा दिलाए जाने की मांग की गई है। मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज होने के बाद अब जिला प्रशासन और शहरी निकायों की भूमिका कठघरे में है।
गौरतलब है कि मुरादाबाद के थाना डिलारी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम काजीपुरा में बीते सोमवार को चार वर्षीय नुसरत को आवारा कुत्तों ने घेरकर नोंच-नोंच कर मार डाला। वहीं संभल के पीटा गांव में 11 जनवरी को अपना शिकार बनाया और मौत के घाट उतार दिया। बेवस माता पिता भी अपनी बच्ची को नहीं बचा सकें।