हरदोई में दर्दनाक सड़क हादसा: पलटे ऑटो में दबकर 11 लोगों की मौत, मौके पर 7 ने तोड़ा दम

25 mins read

भीषण हादसे में उजड़ गए परिवार: एक ही झटके में मौत ने 11 लोगों को निगल लिया

हरदोई के बिल्हौर-कटरा राज्य राजमार्ग पर बुधवार दोपहर में हुआ हादसा इतना भीषण था कि ऑटो सवार ज्यादातर लोगों को चीखने का भी मौका नहीं मिला। ऑटो पलटा और दबकर 11 लोगों की जान चली गई। इनमें से सात लोगों की मौत मौके पर ही हो गई। मरने वाले सभी ऑटो में सवार थे। कोई अपने करीबी की मौत की सूचना पर दुख व्यक्त कर घर जा रहा था तो कोई महिला मायके जा रही थी। एक परिवार का इकलौता बेटा दवा लेने के लिए निकला था, लेकिन मौत ने रास्ते में ही दबोच लिया।

इकलौते बेटे की मौत से बदहवास हो गए माता-पिता
माधौगंज कस्बे के पटेल नगर पूर्वी निवासी सत्यम कुशवाहा (20) बीएससी द्वितीय वर्ष का छात्र था। उसके पिता पप्पू पुताई का काम करते हैं, जबकि मां ज्ञानवती आशा कार्यकर्ता हैं। सत्यम माता-पिता का इकलौता पुत्र था। उसे दो दिन से बुखार आ रहा था। राहत न मिलने पर वह दवा लेने के लिए हरदोई जा रहा था। ऑटो से बिलग्राम में उतरकर उसे हरदोई के लिए बस लेनी थी। बिलग्राम पहुंचने से पहले ही सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई। मां ज्ञानवती और पिता पप्पू शव देखकर बदहवास हो गए। 

मां-बेटी को हरदोई से बरेली जाने के लिए पकड़नी थी ट्रेन
दुर्घटना में जान गंवाने वाली पटियनपुरवा निवासी सुनीता और उनकी बेटी आशी का इंतजार बरेली में हो रहा था। वह दोनों तो नहीं पहुंचे, लेकिन उनकी मौत की जानकारी पहुंच गई। दरअसल, सुनीता का मायका बरेली में है। भैयादूज पर सुनीता घर नहीं जा पाई थी। बुधवार को वह बेटी आशी के साथ बरेली जाने के लिए निकली थी। माधौगंज से ऑटो में सवार होकर बिलग्राम जा रही थी। बिलग्राम से हरदोई बस से और फिर हरदोई से ट्रेन से बरेली जाना था। सुनीता का पति आलोक खेती करते हैं। एक पुत्र उमंग (15) विद्यार्थी है।

शोक जताने गई थीं, घर न पहुंच सकीं सगी बहनों समेत तीन महिलाएं
बिलग्राम कोतवाली क्षेत्र के इटौली गांव निवासी नीलम (60) का ननिहाल मल्लावां कोतवाली क्षेत्र के महनेपुर गांव में है। नीलम के ममेरे भाई की मौत मंगलवार को हो गई थी। दुख जताने के लिए नीलम अपने भतीजे राकेश की पत्नी राधा और राधा की बहन अल्लीगढ़ निवासी निर्मला के साथ महनेपुर गई थीं। बुधवार की सुबह नीलम के देवर गोकरन ने उसे राधा और निर्मला के साथ महनेपुर मोड़ से बिलग्राम जाने के लिए ऑटो पर बैठाया था। गोकरन ने गांव पहुंचकर मिलने की बात कही थी, लेकिन निर्मला, नीलम और राधा का यह आखिरी सफर हो गया।

त्योहार रोशन करने आया था विमलेश, अंधेरा कर गया
सुरसा थाना क्षेत्र के सर्रा सथरा निवासी विमलेश (17) मेरठ में रहकर प्राइवेट फैक्टरी में काम करता था। दीपावली पर वह घर आया था। त्योहार पर उसने खूब रोशनी की। मंगलवार को वह अपनी बुआ के बेटे संजय के घर माधौगंज थाना क्षेत्र के पहुंतेरा गांव गया था। यहां से संजय अपने पारिवारिक भतीजे आनंद और मामा के बेटे विमलेश के साथ बिलग्राम जाने के लिए बुधवार सुबह ऑटो लेकर निकला था। हादसे में आनंद और संजय घायल हो गए, जबकि विमलेश की मौत हो गई। विमलेश तीन भाइयों में सबसे छोटा और अविवाहित था।

हादसे में इनकी हुई मौत
हादसे के मृतकों में बिलग्राम कोतवाली क्षेत्र की इटौली गांव निवासी राजाराम की पत्नी नीलम (60) और उनके भतीजे राकेश की पत्नी राधा (30), राधा की बहन निर्मला (40), मल्लावां कोतवाली क्षेत्र के मझिगवां गांव निवासी माधुरी (37), माधौगंज थाना क्षेत्र के पटियनपुरवा निवासी आलोक की पत्नी सुनीता (35) और उनकी पुत्री आशी (11), माधौगंज कस्बे के पटेलनगर पूर्वी निवासी सत्यम कुशवाहा (20), सुरसा थाना क्षेत्र के सर्रा सथरा निवासी विमलेश (17), सांडी थाना क्षेत्र के गुर्रा गांव निवासी रोशनी (26) और उनकी पुत्री वंशिका (5) और बेटा प्रांशु शामिल हैं। रोशनी के पति गंभीर रूप से घायल हैं।

ये लोग हैं घायल
घायलों में रमेश, माधौगंज थाना क्षेत्र के पहुंतेरा निवासी ऑटो चालक संजय (37) और उसका पारिवारिक भतीजा आनंद (22) व गुर्रा निवासी बालेश्वर (30) शामिल हैं। रमेश और संजय का इलाज मेडिकल कॉलेज हरदोई में चल रहा है। आनंद और बालेश्वर को लखनऊ रेफर किया गया है।

ऑटो में क्षमता से अधिक बैठी थीं सवारियां, पुलिस बेखबर
ऑटो में क्षमता से अधिक सवारियां बैठी थीं। यदि ऑटो में मानक के अनुसार चार लोग ही सवार होते, तो हादसा इतना बड़ा न होता।बताया जा रहा कि ऑटो चालक जहां से सवारी बैठाकर चलता है, वहां से थाना 500 मीटर और जहां पर सवारियों को उतरता है, वहां से दूसरा थाना 300 मीटर दूर है। इसके बावजूद ऑटो वाले यातायात नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। यही नहीं, इस समय तो यातायात सप्ताह भी मनाया जा रहा है। इसके बावजूद ऑटो चालक क्षमता से अधिक सवारियां बैठाकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। पुलिस को खबर तक नहीं है।

Jarees malik

Sarkar Ki Kahani
M: 9997411800, 9719616444

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Latest from Blog

बिजनौर में झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही से मरीज की जान जाने पर भी खुले रहते हैं झोलाछापों के दरवाजें

स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर लगता है प्रश्न चिन्ह मुस्तकीम राजपूत (संवाददाता) बिजनौर में इन दिनों