/

430 सुनवाइयों के बाद आया न्याय, 28 साल पुराने बंधक बनाकर दुष्कर्म के मामले में तीन दोषी करार

22 mins read

28 साल बाद सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दो भाइयों समेत तीन दोषियों को 10-10 साल की सजा

Hardoi News: हरदोई जिले में तकरीबन 28 साल पहले हुई बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म करने की घटना में दो सगे भाइयों समेत तीन लोगों को 10-10 साल की सजा सुनाई गई। सिर्फ बंधक बनाए जाने का आरोप सिद्ध होने पर एक अभियुक्त काे नौ माह की सजा सुनाई गई है। कुल 23 हजार रुपये का जुर्माना भी सभी आरोपियों पर हुआ है। जुर्माने की आधी रकम पीड़िता को देने के आदेश भी अपर जिला जज (एफटीसी महिला) सुनील कुमार सिंह ने दिए हैं।

खास बात यह है कि आरोपियों में घटना का विवेचक भी शामिल है। मझिला थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 28 अगस्त 1996 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि उसकी पुत्री (13) 24 अगस्त को दिन में 12 बजे लघुशंका के लिए घर से गई थी। गांव के ही राजाराम ने उसे अपने घर में बंधक बना लिया था। पुत्री को तलाशने के दौरान राजाराम के घर से आवाजें आने पर वहां दस्तक दी गई थी, तब पुत्री वहीं मिली।

पिता के खिलाफ ही लगाया दुष्कर्म का आरोप
इसी दौरान राजाराम ने जान माल की धमकी दी थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने किशोरी का बयान 19 अक्तूबर 1996 को जज के सामने कराया था। इसमें किशोरी ने अपने पिता पर ही दुष्कर्म करने का आरोप लगा दिया था। पुलिस ने पिता के खिलाफ दुष्कर्म के आरोप में आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद जब गवाही का क्रम सुनवाई के दौरान आया, तो किशोरी ने 10 अप्रैल 2002 को बताया कि वह लघुशंका के लिए गई थी, तो गांव के ही राजाराम, रामचंद्र, रामलड़ैते ने उसे पकड़ लिया था।

थाने में विवेचक ने भी किया कुकृत्य
राजाराम के घर में बंधक बना लिया था। रामचंद्र और राजाराम ने उसके साथ दुष्कर्म किया था। इसके बाद बाबूराम के घर में बंधक बनाकर रखा। इसी दौरान थाने में तैनात तत्कालीन उपनिरीक्षक कुलपतिराम वहां आए और उसे थाने ले जाकर नौ दिन रखा। वहीं, किशोरी के साथ दुष्कर्म भी किया। इसके बाद उसे चठिया के अवधेश सिंह के घर में रखा। यहां अवधेश ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया।

बयानों के बाद शुरू हुई थी सुनवाई
किशोरी के इन बयानों के बाद न्यायालय ने उक्त सभी आरोपियों को 16 मई 2002 को तलब कर लिया। इसके बाद पूरे मामले की सुनवाई किशोरी के पिता, अवधेश सिंह, रामलड़ैते, राजाराम, रामचंद्र, बाबूराम और विवेचक कुलपतिराम के खिलाफ सुनवाई शुरू हुई।

10-10 साल की सजा सुनाई गई
मामले की सुनवाई पूरी कर अपर जिला जज सुनील कुमार सिंह ने राजाराम, रामचंद्र और कुलपतिराम को 10-10 साल की सजा सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में सुनाई है। बाबूराम को नौ माह की सजा किशोरी को बंधक बनाने के आरोप में सुनाई गई है। सुनवाई के दौरान किशोरी के पिता जो आरोपी और वादी दोनों ही थे की मौत हो गई थी। अवधेश सिंह और रामलड़ैते की मौत भी सुनवाई के दौरान हो चुकी थी।

Trending Video

घटना के 11 माह बाद पुलिस ने कराया था मेडिकल
किशोरी से दुष्कर्म की वारदात में तत्कालीन पुलिस कर्मियों ने जमकर हीलाहवाली की। किशोरी के 164 के तहत दिए गए बयान के आधार पर उसके पिता को जेल भेज दिया था, लेकिन पीड़िता का मेडिकल कराया ही नहीं। जमानत पर बाहर आए पिता ने तत्कालीन डीआईजी से गुहार लगाई और तब घटना के 11 माह बाद पुलिस ने किशोरी का मेडिकल कराया था। इसमें सामूहिक दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी।

28 साल में 430 बार हुई सुनवाई, किशोरी को धमकाकर दिलाया था गलत बयान
न्यायालय में मामला पहुंचने के बाद 28 साल में 430 बार प्रकरण की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कुल आठ गवाह पेश किए गए। इसके अलावा बड़ी संख्या में लिखित साक्ष्य भी पेश किए गए। किशोरी ने बयानों के दौरान बताया था कि घटना के विवेचक कुलपतिराम ने आरोपियों के साथ मिलकर उसे धमकाया था। कहा था कि न्यायालय में पिता पर ही दुष्कर्म करने की बात कहनी है। ऐसा न किया तो पिता की हत्या कर देंगे।

कब क्या हुआ

  • 24 अगस्त 1996 को घटना हुई।
  • 28 अगस्त 1996 को रिपेार्ट दर्ज हुई।
  • 19 अक्तूबर 1996 को किशोरी का 164 का बयान हुआ।
  • छह जुलाई 1997 को डीआईजी के आदेश पर मेडिकल हुआ।
  • 10 अप्रैल 2002 को पीड़िता ने गवाही दी।
  • 16 मई 2002 को आरोपी तलब हुए।
  • 12 अगस्त 2024 को अंतिम गवाही विवेक कुलपति राम की हुई।

Jarees malik

Sarkar Ki Kahani
M: 9997411800, 9719616444

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Latest from Blog

बिजनौर में झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही से मरीज की जान जाने पर भी खुले रहते हैं झोलाछापों के दरवाजें

स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर लगता है प्रश्न चिन्ह मुस्तकीम राजपूत (संवाददाता) बिजनौर में इन दिनों